बृहदारण्यकोपनिषद्भाष्यम्
(मूलम् — बृहदारण्यकोपनिषत्)
(भाष्यम् — श्रीमदानन्दतीर्थभगवत्पादाचार्यः)
॥ अश्वब्राह्मणम् ॥
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